Kilkari Bihar: शिक्षा विभाग के अंतर्गत किलकारी बिहार बाल भवन पूर्णिया में राज्य स्तरीय लोक नाच उत्सव 2025 का आगाज हुआ। किलकारी बिहार बाल भवन की ओर से विश्व रंगमंच दिवस पर आयोजन हुआ। सुबह 9 बजे रंगयात्रा निकाल कर इसकी शुरुआत हुई। जिसमें विभिन्न प्रमंडल से आए सभी प्रतिभागी कलाकार एवं किलकारी बिहार बाल भवन के विभिन्न प्रमंडल के आगंतुक प्रशिक्षक व अधिकारी के साथ-साथ किलकारी बिहार बिल भवन, पटना के निर्देशिका ज्योति परिहार भी शामिल रही।
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Kilkari Bihar: रंगयात्रा की शुरुआत
रंगयात्रा की शुरुआत किलकारी बिहार बाल भवन, पूर्णिया के प्रांगण से शुरू हुई, जहां पूर्णिया के एडीएम राजकुमार गुप्ता और एसडीएम पार्थ गुप्ता ने रंगयात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रंग यात्रा शहर के विभिन्न चौक चौराहा से गुजरती हुई पूर्णिया के कचहरी से होकर गिरजा चौक और फिर आस्था मंदिर से अपने गंतव्य पर वापस पहुंची। इस दौरान रंग-बिरंगे परिधान में सभी कलाकार अपनी अपनी कला प्रतिभा का प्रदर्शन भी करते रहे।

मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत शाम 5:30 बजे से हुई, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में पूर्णिया के प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार, पूर्णिया के जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार एवं अपर समाहर्ता, जय चंद्र यादव भी शामिल हुए । सर्वप्रथम मुख्य अतिथि ने किलकारी प्रांगण का भ्रमण किया। उसके उपरांत मंच पर अतिथियों के स्वागत मे स्वागत ज्ञान की प्रस्तुति हुई। इसके उपरांत मुख्य अतिथि सहित अन्य गणमान्य लोगों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया और लोकनाच उत्सव 2025 की शुरुआत हुई । अतिथियों का स्वागत किलकारी की निर्देशका ज्योति परिहार पूर्णिया प्रमंडल के समन्वयक त्रिदीप
शील एवं सीपीसी रवि मुकुल ने किया। मंच संचालन सुचित्रा कुमारी ने किया। इस मौके पर आयोजन की ओर से अतिथियों को प्रतीक चिन्ह और कलाकृति युक्त एक झोला के साथ शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। मुख्य कार्यक्रम की शुरुआत मेजबान टीम पूर्णिया ने की और जयति जय जय भारतम गीत पर स्वागत गीत पेश कर उपस्थित सभा जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उसके उपरांत किलकारी बिहार बाल भवन, पटना के द्वारा जाट जाटिन नृत्य की प्रस्तुति की गई, जो अपने आप में बिहार के लोक रंग के एक अलग छटा बिखेरी ।

सारण प्रमंडल के द्वारा लुप्तप्राय लौंडा नाच की प्रस्तुति हुई ज्ञात हो कि इस लोक नृत्य की भी अपनी एक अलग परंपरा रही है। भागलपुर प्रमंडल के कलाकारों द्वारा के द्वारा झूमर की जोरदार प्रस्तुति हुई। दरभंगा ने सामा चकेवा जैसे महत्वपूर्ण पर्व को मंच पर परिभाषित करते हुए लोक नृत्य की जीवंत प्रस्तुति दी। मिथिलांचल की खुशबू महसूस की गई तो वहीं मगध की खुशबू को समेटे हुए गया की प्रस्तुति हम गैनी पनिया भरे भी सबों को मोहित कर गया । यह एक मगही लोक नृत्य के रूप में प्रस्तुत हुई ।भारतीय लोक परंपरा में गोदना का हमेशा से एक अलग ही स्थान रहा है।

Kilkari Bihar: पहले लोग अपने हाथों पर अधिकतर गुदवाते थे, पुरातत्व काल में गोदना इसलिए भी गुदवाई जाती थी कि हाथों पर लिखे नाम से उसकी पहचान हो सके। फिर यह परंपरा फैशन बन गया और यह फैशन भारत से होता हुआ विदेश में भी मशहूर हो गया, तब इसे टैटू का नाम दिया गया। लेकिन हमारी लोक परंपरा में इस गोदना के प्रति एक अलग आस्था है ,जिसके तहत गोदना गीत गाए जाते हैं और इसी गोदना गीत को मुंगेर प्रमंडल के कलाकारों ने जोरदार ढंग से प्रस्तुत किया अंत में गोकुलपुर पूर्णिया से बुलाई गई विशेष नाच मंडली के कलाकारों ने लोक परंपरा भगैत की प्रस्तुति देते हुए पहले दिन के कार्यक्रम को संपन्न किया।
Kilkari Bihar, मौके सर्वप्रथम किलकारी की निदेशिका ज्योति परिहार ने अपने संबोधन में कहा कि, हमारे बच्चे देश के जो नौनिहाल हैं इस नाच उत्सव में एक-एक बारीकियों को देखेंगे सीखेंगे । मेरी शुभकामना है कि हमेशा की तरह आप मुस्कुराते रहें ,खुश रहें। जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारा यह किलकारी केंद्र हर क्षेत्र में उत्तरोत्तर विकास कर रहा है एवं जिला प्रशासन की ओर से जिस किसी भी बात की निगरानी करनी होगी या सहयोग प्रदान करना होगा जिला प्रशासन की ओर से मैं उसके लिए तैयार हूं। इस केंद्र को जो भी आवश्यकता होगी वह मैं मुहैया कराऊंगा चूंकि हर क्षेत्र में हमारा यह किलकारी बहुत बढ़िया प्रयास कर रहा है ,यहां के प्रशिक्षक यहां के बच्चे सभी एक से बढ़कर एक है इसकी शुभकामनाएं।

Kilkari Bihar: कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्णिया के प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने कहा कि यह किलकारी सचमुच बच्चों की बगिया से भरा हुआ है और जैसा कि मुझे सूचना मिल रही है हर विधा में यहां के बच्चे बहुत अच्छा कर रहे हैं पूरे बिहार में किलकारी का केंद्र है ,इसकी भी सूचना मुझे है, जानकारी और बराबर में जानना चाहता हूं कि यहां क्या चल रहा है साथ ही सहरसा मेरे अधिकार क्षेत्र में है तो मैं वहां के किलकारी को जरुर देखना चाहूंगा कि वहां क्या कुछ चल रहा है और हमसे जो भी सहायता बन पड़ेगी प्रशासनिक रूप से मैं देने को तैयार हूं। सहयोग करने को तैयार हूं सभी आयोजन कर्ता को किलकारी परिवार को बहुत-बहुत शुभकामनाएं और हर क्षेत्र में आप उत्तरोत्तर विकास करें राष्ट्र के लिए काम करें यही शुभेच्छा व्यक्त करता हूं।
Kilkari Bihar: कार्यक्रम को सफल बनाने में किलकारी बिहार बाल भवन पूर्णिया प्रमंडल के सभी कर्मी और प्रशिक्षक के के साथ-साथ सभी अधिकारी व छात्र लगे रहे। किलकारी के संबंध में एपीओ नेहा कुमारी सीआरपी रुचि कुमारी लेखा पदाधिकारी श्रेया कुमारी संगीत प्रशिक्षक पंडित अमरनाथ झा समेत सभी का विशेष योगदान रहा।